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जुलूस की भीड़ : एक संक्षिप्त परिचय

सबसे पहला सवाल यही आता है कि इस संकलन में किस तरह की कहानियाँ हैं ? शीर्षक जुलूस की भीड़ से क्या आशय है ?

इसका उत्तर एक दम सपाट नहीं | अगर पाठक संवेदनशील है तो कुछ कहानियाँ उनके पलकों गीली कर सकती हैं | कुछ कहानियों का प्लॉट ऐसा है जिनका सामना आप और हम रोज़ ही करते हैं | प्रेम की अपूर्णता इस संकलन का एक ख़ास फ़ीचर है | अपूर्णता कई जगहों पर अलगाव पर समाप्त हुआ है तो कई जगह उससे बहुत आगे तक पहुँचा है |

   ऐसे माहौल में जहां घटनाओं की समीक्षा में राजनीति का कोण सबसे पहले आता हो , उस राजनीतिक परिस्थितियों को झुठलाया नहीं जा सकता है |कई कहानियों में मुख्य क़िरदार राजनीतिक षड्यंत्रों का शिकार होता दिखा है | एक दो कहानियों पर भाषायी अभिजात्यता का आरोप लग सकता है लेकिन यह कहानी की मांग रही है | तगण ऐसी ही एक कहानी है जिसमें शास्त्रीयता और पांडित्य प्रदर्शन दिख जाता है लेकिन सम्यक पठन के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि अंधविश्वास पर तर्क की विजय स्थापना के लिए यह आवश्यक है | कुछ कहानियों में कथारस का पान पाठक कर सकेंगे ; अथ श्री सुखई कथा एक ऐसी कहानी है |

निर्णय न ले पाना जीवन की सबसे बड़ी समस्या है और यह समस्या मध्यम वर्ग के साथ और भी बढ़ जाती है | चूँकि संख्या के हिसाब मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ता जा रहा है तो स्वाभाविक है कि बढ़ते उपभोक्तावादी युग में यही मध्यम वर्ग बहुराष्ट्रीय कंपनियों सबसे ज़्यादा लक्षित किया जायेगा | 'अनिर्णय' का नायक आर्यन ऐसी ही निर्णय समस्या से जूझता है |


सभी कहानियाँ समय सापेक्ष हैं जिसमें बदलते समय के मूल्य गूँथे हुए हैं |

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