'कहानी' की कहानी ' कहानी क्या है ' कि जगह अगर 'कहानी क्या नहीं है' पर विचार किया जाए तो शायद कहानी के विस्तार को समझना ज़्यादा आसान होगा ! 'षष्ठी शेषे' अर्थात् 'जो बचा वह छठी विभक्ति' वाला सूत्र क्या कहानी पर लग सकता है ? किसी घटना की तथ्यपरक प्रस्तुति कहानी नहीं है | इतिहास लेखन भी कहानी नहीं | धर्मशास्त्र और उसमें उपस्थित नैतिक उपदेश भी कहानी की श्रेणी में नहीं है | समाचार पत्र के लेखों को आजकल 'स्टोरी' कहा जाने लगा लेकिन साहित्यिक अर्थ में वो भी कहानी नहीं है | जो कहानी नहीं है उसमें भी कहानी की संभावना बनी रहती है बस एक समर्थ कहानीकार की ज़रूरत है जो इस संभावना को यथार्थ में बदल सके | मन में चल रही उधेड़बुन को शब्दों में गूंथना ही रचना कर्म है | मन में जो चल रहा है उसको ज्यों का त्यों शब्दों के ताने बाने में बुन पाना संभव नह...